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हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि० के बारें में - About Hazrat Ammar bin Yasir r.a.

  हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि० के बारें में - Hazrat Ammar bin Yasir r.a.   हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि० रसुलल्लाह सल्लाहों अलैहि वसल्लम के सबसे चहिते सहाबाओं में से एक थे।   हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि० का नाम उन महान हस्तियों में शामिल है, जिन्होंने दीन की खातिर अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। वह उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने मक्का में इस्लाम स्वीकार किया और आख़िरी सांस तक हक के रास्ते पर अडिग रहे। हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि० एक बहादुर योद्धा के साथ साथ एक बहुत ही नेक और सच्चे इंसान थे। उन्होंने इस्लाम की तमाम प्रमुख जंगों (बद्र, उहद और खंदक) में हिस्सा लिया। उनके बारे में रसूलल्लाह (ﷺ) ने फरमाया था: "ईमान अम्मार की हड्डियों और रगों में बस गया है।" - इब्ने माजह हदीस नंबर 147  एक मर्तबा और रसुलल्लाह सल्लाहों अलैहि वसल्लम ने हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि० के बारे में फ़रमाया कि "अम्मार की ज़ुबान शैतान से महफूज़ है" , यानी हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि० अपनी ज़ुबान से जब भी बोलेंगे हक़ और सच ही बोलेंगे - सही बुख़ारी हदीस नंबर 3287  हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़ि० का बचपन...
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फरमाने हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम

  फरमाने हज़रत ईमाम हुसैन - अलैहिस सलाम  ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जितनी देर से उठोगे उतनी ज्यादा क़ुरबानी देनी पड़ेगी  - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम  जिसका मददग़ार खुदा के आलावा कोई न हो, ख़बरदार  उस पर ज़ुल्म न करना - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम  जो व्यक्ति अपने गुस्से पर क़ाबू रखता है, अल्लाह उसके ऐब छुपा देता है - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम  सूफ़ी वह नहीं जो सिर्फ पहनावे से पहचाना जाये, बल्कि सूफ़ी वह है जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम 

Sahaba Iqram ki vo Haqeeqat jo aksar Molvi bayan nahi karte hai

  Sahaba Iqram ki vo Haqeeqat jo aksar Molvi bayan nahi karte hai सहाबा इक़राम की वो हकीकत जो अक्सर मौलवी बयान नहीं करते है।   दोस्तों, आपलोगों ने भी अक्सर मौलवी के बयान  में सहाबा इक़राम रज़ि० का बयान सुना होगा और मौलवी जब बयान करते है तो ऐसे बायां करते है कि सहाबा इक़राम एकदम मासूम हो और उनसे कभी कोई गलती हुई ही नहीं हो और सबके सब जन्नती है।  लेकिन क्या हमने कभी ये जानने की कोशिश किया कि क़ुरआन और हदीस ए नबवी में इनके बारे में क्या लिखा है।   सबसे पहले ये जानते है कि इस्लाम की सबसे बड़ी किताब जिसमें अल्लाह का फ़रमान है यानी क़ुरआन शरीफ़ में सहाबा इक़राम रज़ि० के बारे में क्या लिखा है। इसके लिए हमको सूरह तौबा की आयत नंबर 100 पढ़ते है।   The Repentance (9:100)  وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلْأَوَّلُونَ مِنَ ٱلْمُهَـٰجِرِينَ وَٱلْأَنصَارِ وَٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُم بِإِحْسَـٰنٍۢ رَّضِىَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا۟ عَنْهُ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى تَحْتَهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ١٠٠ As...

The human brain is a magnificent creation of Allah.

The human brain is a magnificent creation of Allah. इंसानी दिमाग़ अल्लाह का एक नायाब तख़लीक़। मानव मस्तिष्क ब्रह्मांड की सबसे जटिल और रहस्यमयी संरचनाओं में से एक है। लगभग 1.4 किलो वजन का यह अंग हमारे पूरे शरीर का नियंत्रण केंद्र है। इस्लाम और पवित्र कुरान के नजरिए से , मस्तिष्क की यह सूक्ष्म बनावट अल्लाह (SWT) की कुदरत और उसकी कारीगरी का एक महान " मोजिज़ा " ( चमत्कार ) है। यहाँ मानव मस्तिष्क और उससे जुड़ी अल्लाह की निशानियों का विवरण दिया गया है : 1. सोचने वाला माथा (Prefrontal Cortex) और कुरान आधुनिक विज्ञान (Neuroscience) के अनुसार , मस्तिष्क का अगला हिस्सा जिसे Prefrontal Cortex कहा जाता है , हमारे फैसले लेने , योजना बनाने और ' सच या झूठ ' बोलने के लिए जिम्मेदार होता है। हैरत की बात यह है कि 1400 साल पहले कुरान ने इस वैज्ञानिक तथ्य की ओर इशारा किया था। सूरह अल - अलक में एक अहंकारी व्यक्ति के बारे में कहा गया है : " कदापि नहीं , यदि वह ...

24 Rajab, Fateh -e- Khybar Fort by Maula Ali a.s. - explained in hindi

  24 Rajab, Battle of Khybar Fort by Maula Ali a.s. - explained in hindi 24 रजब: फतेह खैबर (खैबर की जीत) इस्लामी इतिहास में खैबर की जीत एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है, जो मौला अली की असाधारण बहादुरी और अटूट संकल्प का प्रतीक है। 24 रजब को खैबर के अभेद्य किले को फतह किया गया था। जब मुस्लिम सेना कई दिनों तक किले को फतह न कर सकी, तब पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) ने वह प्रसिद्ध घोषणा की जिसने इतिहास बदल दिया। हदीस-ए-खैबर (Hadith on Fateh Khybar) حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ لأُعْطِيَنَّ الرَّايَةَ غَدًا رَجُلاً يَفْتَحُ اللَّهُ عَلَى يَدَيْهِ ‏"‏ قَالَ فَبَاتَ النَّاسُ يَدُوكُونَ لَيْلَتَهُمْ أَيُّهُمْ يُعْطَاهَا فَلَمَّا أَصْبَحَ النَّاسُ، غَدَوْا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كُلُّهُمْ يَرْجُو أَنْ يُعْطَاهَا فَقَالَ ‏"‏ أَيْنَ عَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ ‏"‏‏.‏ فَقَالُوا يَشْتَكِي عَيْنَيْهِ يَا رَسُولَ اللَّهِ‏.‏ قَالَ ‏...

22 Rajab Niaz e Imam Jaffer Sadiq a.s.

    २२ रज़ब नियाज़-ए-  ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) के बारे मे  ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) के बारे मे  ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) इस्लाम के छठे इमाम हैं। उनकी पैदाइश (जन्म) 17 रबी-उल-अव्वल को मदीना में हुई थी। उनके पिता का नाम इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ.स.) और माता का नाम उम्मे फरवा था। उन्हें 'सादिक़' कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपने पूरे जीवन में केवल सत्य का प्रचार किया। ईमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) का — तआरुफ़ व तारीख़ी शख़्सियत आपका पूरा नाम - अबू अब्दुल्लाह जाफ़र इब्न मुहम्मद अल-सादिक विलादत 17 रबीउल अव्वल 83 हिजरी / 702 ईसवी — मदीना वफ़ात 25 शव्वाल 148 हिजरी / 765 ईसवी — मदीना आपका मदफ़न - जन्नतुल बक़ी, मदीना वालिद ईमाम मुहम्मद बाक़िर अ०स० वालिदा उम्मे फरवा बिन्त अल-क़ासिम ईमाम  की उपलब्धियाँ (Achievements) ईमाम का दौर "इल्म (ज्ञान) का स्वर्ण युग" माना जाता है। उनकी मुख्य उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं: इल्मी यूनिवर्सिटी (University): उन्होंने मदीना में एक विशाल मदरसा स्थापित किया, जहाँ लगभग 4,000 छात्र एक साथ शिक्षा प्राप्त करते थे। विज्ञान में योगदान: इमाम ...

Allah ke Wali ki Shan me Quranic Ayat aur Hadees

Image for representation only   Allah ke Wali ki Shan me Quranic Ayat aur Hadees Surah Younus, Ayat No. 62 -       Jonah (10:62)  أَلَآ إِنَّ أَوْلِيَآءَ ٱللَّهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ ٦٢ There will certainly be no fear for the close servants of Allah, nor will they grieve. सुन लो! निःसंदेह अल्लाह के मित्रों को न कोई भय है और न वे शोकाकुल होंगे। Holy Quran:  10-62 Hadees e Nabvi-saw حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، قَالاَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ الْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ بْنِ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِنَّ مِنْ عِبَادِ اللَّهِ لأُنَاسًا مَا هُمْ بِأَنْبِيَاءَ وَلاَ شُهَدَاءَ يَغْبِطُهُمُ الأَنْبِيَاءُ وَالشُّهَدَاءُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِمَكَانِهِمْ مِنَ اللَّهِ تَعَالَى ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ تُخْبِرُنَا مَنْ هُمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ هُمْ قَوْمٌ تَحَابُّوا بِرُوحِ اللَّهِ عَلَى غَيْرِ أَرْحَا...