जंग ए सिफ़्फ़ीन - हक़ और बातिल की जंग जंग ए सिफ़्फ़ीन इस्लामी तारीख़ की वो जंग है जिसने मुसलमानों के बीच हक़ - बातिल और मोमिन - मुनाफिक़ीन के फ़र्क़ को साफ़ कर दिया। साल 657 ईस्वी में जब तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा की शहादत हो गयी और उम्मत ने हज़रत अली रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा को चौथा ख़लीफ़ा चुन लिया, तब शाम यानी आज का सीरिया के गवर्नर मुआविया बिन सुफ़ियान ने हज़रत उस्मान के क़ातिलों को पकड़ने का मुतालबा हज़रत अली से करने लगा, जबकि हज़रत अली का कहना था कि असली मुज़रिम को पकड़ने के लिये थोड़ा वक़्त चाहिए , लेकिन मुआविया बिन सुफ़ियान इस कदर अपनी ज़िद पे आ गया और उसने हज़रत अली से जंग करने का इरादा बना लिया। फरात नदी के किनारे सिफ़्फ़ीन के मैदान में ये दोनों फौजे टकराने वाली थी। जंग की शुरुआत प्यास से हुई जब मुआविया की फौज ने फरात नदी पे कब्ज़ा कर लिया और हज़रत अली के लश्करों के लिए पानी बंद कर दिया। हजरत अली के सिपहसालार ...
हज़रत अब्दुल क़ादिर जिलानी रहमत उल्लाह अलैहे का वाक़िया - एक डाकू कैसे अल्लाह का वली बन गया. Image is representational only पीरों के पीर हज़रत अब्दुल क़ादिर जिलानी रहमत उल्लाह अलैहे को भला इस दुनिया में कौन नहीं जानता, उनके मानने वाले दुनिया के कोने कोने में है. आज में आपको एक डाकू जो आगे चलकर अल्लाह का वली बन गए उनका वाक़िया बताने वाला हूँ। जब एक काफिला बगदाद की तरफ जा रहा था तो उस काफ़िले में एक नौउम्र लड़का भी था जब डाकुओं ने उस काफ़िले पर हमला कर दिया तो लोगो ने अपना माल छुपाने की कोशिश करने लगे लेकिन डाकुओं ने सब माल उनसे छीन लिया। जब सभी लोगो से पूछताछ होने लगी तो जब इस लड़के की बारी आयी तो डाकू ने पूछा की तुम्हारे पास भी कुछ माल है तो इस लड़के ने कहा हा मेरे पास ४० दीनार है तो डाकुओ को बड़ी हैरत हुई. तो डाकू ने पूछा की कहा है तो लड़के ने कहा मेरी कमर के कपडे में मेरी माँ ने सिलाई कर दिया है तो जब तलाशी ली गयी तो वो ४० दीनार निकल आयी। इस लड़के के सच बोलने पर डाकुओं के सरदार को सोचने पर मज़बूर कर दिया कि कैसे एक छोटा लड़का सच बोल रहा है औ...