जंग ए सिफ़्फ़ीन - हक़ और बातिल की जंग जंग ए सिफ़्फ़ीन इस्लामी तारीख़ की वो जंग है जिसने मुसलमानों के बीच हक़ - बातिल और मोमिन - मुनाफिक़ीन के फ़र्क़ को साफ़ कर दिया। साल 657 ईस्वी में जब तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा की शहादत हो गयी और उम्मत ने हज़रत अली रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा को चौथा ख़लीफ़ा चुन लिया, तब शाम यानी आज का सीरिया के गवर्नर मुआविया बिन सुफ़ियान ने हज़रत उस्मान के क़ातिलों को पकड़ने का मुतालबा हज़रत अली से करने लगा, जबकि हज़रत अली का कहना था कि असली मुज़रिम को पकड़ने के लिये थोड़ा वक़्त चाहिए , लेकिन मुआविया बिन सुफ़ियान इस कदर अपनी ज़िद पे आ गया और उसने हज़रत अली से जंग करने का इरादा बना लिया। फरात नदी के किनारे सिफ़्फ़ीन के मैदान में ये दोनों फौजे टकराने वाली थी। जंग की शुरुआत प्यास से हुई जब मुआविया की फौज ने फरात नदी पे कब्ज़ा कर लिया और हज़रत अली के लश्करों के लिए पानी बंद कर दिया। हजरत अली के सिपहसालार ...
मुआवियां बिन सूफियान की मुनाफ़िक़त - क़ुरान और सही हदीस की रोशनी में अस्सलामों अलैकुम दोस्तों, हमने इससे पहले ब्लॉग में अमीर मुआविया की हक़ीक़त - क़ुरान और हदीस की रौशनी में लिखा था, जिसका लिंक हमने नीचे उल्लेख किया है। आजके इस ब्लॉग में हम मुआवियाँ की मुनाफ़िक़त क़ुरान और हदीस की रौशनी में जानेंगे। आईये क़ुरान और सही हदीस की रोशनी में मुआविया की मुनाफ़िक़त को जानते है। सबसे पहले क़ुरआन शरीफ़ की सूरह अहज़ाब की आयत नंबर 57 पेश करता हू, जिसमें अल्लाह पाक फरमाते है कि, "जिसने अल्लाह और उसके रसूल सल्लाहों अलैहि वसल्लम को गाली दी, उनपर दुनिया और आख़िरत में अल्लाह की लानत है"। 33:57 إِنَّ ٱلَّذِينَ يُؤْذُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ لَعَنَهُمُ ٱللَّهُ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًۭا مُّهِينًۭا ٥٧ Surely those who offend Allah and His Messenger are condemned by Allah in this world and the Hereafter. And He has prepared for them a humiliating punishment. निस्संदेह, जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को बुरा भला कहते हैं, अल्लाह ...