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Showing posts from March, 2025

Jung e Siffin - Haq-Baatil aur Momin-munafeqeen ki jung in hindi

                जंग ए  सिफ़्फ़ीन                   - हक़ और बातिल की जंग  जंग ए सिफ़्फ़ीन इस्लामी तारीख़ की वो जंग है जिसने मुसलमानों के बीच हक़ - बातिल और मोमिन - मुनाफिक़ीन के फ़र्क़ को साफ़ कर दिया।   साल 657 ईस्वी में जब तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा की शहादत हो गयी और उम्मत ने हज़रत अली  रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा को चौथा ख़लीफ़ा चुन लिया, तब शाम यानी आज का सीरिया के गवर्नर मुआविया बिन सुफ़ियान ने हज़रत उस्मान के क़ातिलों को पकड़ने का मुतालबा हज़रत अली से करने लगा, जबकि हज़रत अली का कहना था कि असली मुज़रिम को पकड़ने के लिये थोड़ा वक़्त चाहिए , लेकिन मुआविया बिन सुफ़ियान इस कदर अपनी ज़िद पे आ गया और उसने हज़रत अली से जंग करने का इरादा बना लिया।   फरात नदी के किनारे सिफ़्फ़ीन के मैदान में ये दोनों फौजे टकराने वाली थी।  जंग की शुरुआत प्यास से हुई जब मुआविया की फौज ने फरात नदी पे कब्ज़ा कर लिया और हज़रत अली के लश्करों के लिए पानी बंद कर दिया।  हजरत अली के सिपहसालार ...

मौला अली की शान में आशार , शेर, कलाम - hindi me,

 मौला अली की शान में आशार , शेर, कलाम  इससे ज्यादा क्या कहू मौला की शान में  पैदा हुए आप खुदा के मकान में  जबसे पढ़ा है क़सीदा मौला की शान में  ताक़त सी आ गयी है मेरे ज़िस्म ओ जान में  मुश्किलकुशा है, आते है मुश्किलकुशाई में  उनको पुकारे कोई किसी भी ज़ुबान में  करने लगे तवाफ़ फ़रिश्तें मकान का  मैं ज़िक्र कर रहा था अली का मकान में  4 खुलफ़ाए राशेदीन में अली ,  5 पंजतन में अली,  10 अशराये मुब्बशिरा में अली,  313 अस्हाबे बद्र में अली, साबे मदीना में अली  ग़दीरे कून में अली, सुलेह हुदैबिया में अली, ख़ैबर में अली, ख़ंदक़ में अली,  मेहराब पे अली तो मिम्बर पे भी अली,  क़ाबा गवाह है दोषे पयम्बर पे भी अली,  हिज़रत की शब् हुज़ूर के बिस्तर पे भी अली,  जन्नत अली की मिल्क है कौसर पे भी अली,  बू ज़र में भी अली, तो सलमान में भी अली, आबाद दमा दम आदम के,  तन तन में अली, पंजतन में अली, लफ्ज़ो में अली,आहो  में अली, अश्क़ो में अली, धड़कन में अली,  फूलों में अली, लहजो में अली,  कलियों में अली, गुलशन में अली, सेहर...

हदीस ए नबवी हज़रत मोहम्मद (स.अलैह.) दरूद शरीफ़ के बारे में - हिंदी में

  हदीस ए नबवी  हज़रत  मोहम्मद  (स.अलैह.) दरूद शरीफ़ के बारे में - हिंदी में  अब्दुर्रहमान बिन अबी लैला ने रिवायत किया:  कअब बिन उजरा ने मुझसे मुलाकात की और कहा, "क्या मैं तुम्हें पैगम्बर से मिला हुआ तोहफा न दूं?" अब्दुर्रहमान ने कहा, "हां, मुझे दे दो।" मैंने कहा, "हमने अल्लाह के रसूल (ﷺ) से पूछा, 'अल्लाह के रसूल (ﷺ)! आप पर, परिवार के सदस्यों पर किस तरह से दुआ भेजी जाए, क्योंकि अल्लाह ने हमें आपको (नमाज़ में) सलाम करना सिखाया है?' उन्होंने कहा, 'कहो: ऐ अल्लाह! मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर अपनी रहमत भेज, जैसा कि तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर अपनी रहमत भेजी, क्योंकि तू सबसे प्रशंसनीय, सबसे महिमावान है। ऐ अल्लाह! मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर अपनी रहमत भेज, जैसा कि तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर अपनी रहमत भेजी, क्योंकि तू सबसे प्रशंसनीय, सबसे महिमावान है।'" Narrated `Abdur-Rahman bin Abi Laila:  Ka`b bin Ujrah met me and said, "Shall I not give you a present I got from the Prophet?" `Abdur- Rahman said, "Yes, ...