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Jung e Siffin - Haq-Baatil aur Momin-munafeqeen ki jung in hindi

                जंग ए  सिफ़्फ़ीन                   - हक़ और बातिल की जंग  जंग ए सिफ़्फ़ीन इस्लामी तारीख़ की वो जंग है जिसने मुसलमानों के बीच हक़ - बातिल और मोमिन - मुनाफिक़ीन के फ़र्क़ को साफ़ कर दिया।   साल 657 ईस्वी में जब तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा की शहादत हो गयी और उम्मत ने हज़रत अली  रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा को चौथा ख़लीफ़ा चुन लिया, तब शाम यानी आज का सीरिया के गवर्नर मुआविया बिन सुफ़ियान ने हज़रत उस्मान के क़ातिलों को पकड़ने का मुतालबा हज़रत अली से करने लगा, जबकि हज़रत अली का कहना था कि असली मुज़रिम को पकड़ने के लिये थोड़ा वक़्त चाहिए , लेकिन मुआविया बिन सुफ़ियान इस कदर अपनी ज़िद पे आ गया और उसने हज़रत अली से जंग करने का इरादा बना लिया।   फरात नदी के किनारे सिफ़्फ़ीन के मैदान में ये दोनों फौजे टकराने वाली थी।  जंग की शुरुआत प्यास से हुई जब मुआविया की फौज ने फरात नदी पे कब्ज़ा कर लिया और हज़रत अली के लश्करों के लिए पानी बंद कर दिया।  हजरत अली के सिपहसालार ...

Duaa sirf Allah se hi - hindi me

  Duaa sirf Allah se hi  दुआ सिर्फ अल्लाह से ही  अस्सलामों अलैकुम,  दोस्तों आज हम जानने की कोशिश करेंगे कि क्या दुआ सिर्फ अल्लाह से ही करना चाहिए ? सबसे पहले हम ये जान लेते है कि दुआ का क्या मतलब होता है? दुआ का मतलब होता है, पुकारना, बुलाना, इल्तिज़ा करना, माँगना, सवाल करना इत्यादी।   अब क़ुरआन शरीफ़ की सूरह बक़रह की आयत नंबर 186 पढ़ते है, जिसमे अल्लाह पाक फरमाते है कि  2:186 وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِى عَنِّى فَإِنِّى قَرِيبٌ ۖ أُجِيبُ دَعْوَةَ ٱلدَّاعِ إِذَا دَعَانِ ۖ فَلْيَسْتَجِيبُوا۟ لِى وَلْيُؤْمِنُوا۟ بِى لَعَلَّهُمْ يَرْشُدُونَ ١٨٦ When My servants ask you ˹O Prophet˺ about Me: I am truly near. I respond to one’s prayer when they call upon Me. So let them respond ˹with obedience˺ to Me and believe in Me, perhaps they will be guided ˹to the Right Way˺. और (ऐ नबी!) जब मेरे बंदे आपसे मेरे बारे में पूछें, तो निश्चय मैं (उनसे) क़रीब हूँ। मैं पुकारने वाले की दुआ क़बूल करता हूँ जब वह मुझे पुकारता है। तो उन्हें चाहिए कि वे मेरी बात मानें तथा मुझपर ईमान लाएँ,...

5 अनमोल दीनी बातें - hindi me,

5 अनमोल दीनी बातें  हज़रत मोहम्मद  (स.अलैह.) ने फ़रमाया,  " इल्म बग़ैर अमल के वबाल है और अमल बग़ैर इल्म के तबाही है।" हज़रत मोहम्मद  (स.अलैह.) ने फ़रमाया, " अगर किसी भी चीज़ पर सब्र करना चाहते हो तो मरने से पहले ख़ुद को मरा हुआ समझो।" हज़रत ईसा  (अलैह.स.) ने फ़रमाया, " बे अमल आलिम की मिसाल ऐसी है जैसे अंधे ने चिराग़ उठा रखा हो। लोग इस से रौशनी हासिल करें और वो ख़ुद अंधेरे में रहे।" हज़रत अली  (रजि.अल.)  ने फ़रमाया, " जिस शख़्स के दिल में जितनी ज़्यादा हिर्स होती है उसे अल्लाह पर उतना ही कम यक़ीन होता है।" हज़रत अली  (रजि.अल.)  ने फ़रमाया, " सब्र एक ऐसी सवारी है जो अपने सवार को गिरने नहीं देती, ना किसी के क़दमों में और ना किसी की नज़रों में।"