Sahaba Iqram ki vo Haqeeqat jo aksar Molvi bayan nahi karte hai सहाबा इक़राम की वो हकीकत जो अक्सर मौलवी बयान नहीं करते है। दोस्तों, आपलोगों ने भी अक्सर मौलवी के बयान में सहाबा इक़राम रज़ि० का बयान सुना होगा और मौलवी जब बयान करते है तो ऐसे बायां करते है कि सहाबा इक़राम एकदम मासूम हो और उनसे कभी कोई गलती हुई ही नहीं हो और सबके सब जन्नती है। लेकिन क्या हमने कभी ये जानने की कोशिश किया कि क़ुरआन और हदीस ए नबवी में इनके बारे में क्या लिखा है। सबसे पहले ये जानते है कि इस्लाम की सबसे बड़ी किताब जिसमें अल्लाह का फ़रमान है यानी क़ुरआन शरीफ़ में सहाबा इक़राम रज़ि० के बारे में क्या लिखा है। इसके लिए हमको सूरह तौबा की आयत नंबर 100 पढ़ते है। The Repentance (9:100) وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلْأَوَّلُونَ مِنَ ٱلْمُهَـٰجِرِينَ وَٱلْأَنصَارِ وَٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُم بِإِحْسَـٰنٍۢ رَّضِىَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا۟ عَنْهُ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى تَحْتَهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ١٠٠ As...
5 अनमोल दीनी बातें
- हज़रत मोहम्मद (स.अलैह.) ने फ़रमाया, "इल्म बग़ैर अमल के वबाल है और अमल बग़ैर इल्म के तबाही है।"
- हज़रत मोहम्मद (स.अलैह.) ने फ़रमाया, "अगर किसी भी चीज़ पर सब्र करना चाहते हो तो मरने से पहले ख़ुद को मरा हुआ समझो।"
- हज़रत ईसा (अलैह.स.) ने फ़रमाया, "बे अमल आलिम की मिसाल ऐसी है जैसे अंधे ने चिराग़ उठा रखा हो। लोग इस से रौशनी हासिल करें और वो ख़ुद अंधेरे में रहे।"
- हज़रत अली (रजि.अल.) ने फ़रमाया, "जिस शख़्स के दिल में जितनी ज़्यादा हिर्स होती है उसे अल्लाह पर उतना ही कम यक़ीन होता है।"
- हज़रत अली (रजि.अल.) ने फ़रमाया, "सब्र एक ऐसी सवारी है जो अपने सवार को गिरने नहीं देती, ना किसी के क़दमों में और ना किसी की नज़रों में।"

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