जंग ए सिफ़्फ़ीन - हक़ और बातिल की जंग जंग ए सिफ़्फ़ीन इस्लामी तारीख़ की वो जंग है जिसने मुसलमानों के बीच हक़ - बातिल और मोमिन - मुनाफिक़ीन के फ़र्क़ को साफ़ कर दिया। साल 657 ईस्वी में जब तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा की शहादत हो गयी और उम्मत ने हज़रत अली रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा को चौथा ख़लीफ़ा चुन लिया, तब शाम यानी आज का सीरिया के गवर्नर मुआविया बिन सुफ़ियान ने हज़रत उस्मान के क़ातिलों को पकड़ने का मुतालबा हज़रत अली से करने लगा, जबकि हज़रत अली का कहना था कि असली मुज़रिम को पकड़ने के लिये थोड़ा वक़्त चाहिए , लेकिन मुआविया बिन सुफ़ियान इस कदर अपनी ज़िद पे आ गया और उसने हज़रत अली से जंग करने का इरादा बना लिया। फरात नदी के किनारे सिफ़्फ़ीन के मैदान में ये दोनों फौजे टकराने वाली थी। जंग की शुरुआत प्यास से हुई जब मुआविया की फौज ने फरात नदी पे कब्ज़ा कर लिया और हज़रत अली के लश्करों के लिए पानी बंद कर दिया। हजरत अली के सिपहसालार ...
Image for representation only Imam Ali in the Quran - Mola Ali ki Shan me Ayat Maula Ali - Karam Allaho wajahul kareem ki Shan me Quranic Ayat 1st Surah Maidah Ayat No.55 - The Table Spread (5:55) إِنَّمَا وَلِيُّكُمُ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُمْ رَٰكِعُونَ ٥٥ Your only guardians are Allah, His Messenger, and fellow believers—who establish prayer and pay alms-tax with humility. तुम्हारे मित्र तो केवल अल्लाह और उसका रसूल तथा वे लोग हैं जो ईमान लाए, जो नमाज़ क़ायम करते और ज़कात देते हैं और वे (अल्लाह के आगे) झुकने वाले हैं। Holy Quran: 5- 55 “Ye Aayat Maula Ali-a.s. ki Shaan me Nazil huwi ya’ani iske Shaane Nuzool Maulae Qaynat hain” “Tafseer Bayzavi Jild 2 Safah 132” “Tafseer ut Tabari Jild 8 Safah 531” “Tafseer ul Jilani Jild 1 Safah 45...