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Jung e Siffin - Haq-Baatil aur Momin-munafeqeen ki jung in hindi

                जंग ए  सिफ़्फ़ीन                   - हक़ और बातिल की जंग  जंग ए सिफ़्फ़ीन इस्लामी तारीख़ की वो जंग है जिसने मुसलमानों के बीच हक़ - बातिल और मोमिन - मुनाफिक़ीन के फ़र्क़ को साफ़ कर दिया।   साल 657 ईस्वी में जब तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा की शहादत हो गयी और उम्मत ने हज़रत अली  रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा को चौथा ख़लीफ़ा चुन लिया, तब शाम यानी आज का सीरिया के गवर्नर मुआविया बिन सुफ़ियान ने हज़रत उस्मान के क़ातिलों को पकड़ने का मुतालबा हज़रत अली से करने लगा, जबकि हज़रत अली का कहना था कि असली मुज़रिम को पकड़ने के लिये थोड़ा वक़्त चाहिए , लेकिन मुआविया बिन सुफ़ियान इस कदर अपनी ज़िद पे आ गया और उसने हज़रत अली से जंग करने का इरादा बना लिया।   फरात नदी के किनारे सिफ़्फ़ीन के मैदान में ये दोनों फौजे टकराने वाली थी।  जंग की शुरुआत प्यास से हुई जब मुआविया की फौज ने फरात नदी पे कब्ज़ा कर लिया और हज़रत अली के लश्करों के लिए पानी बंद कर दिया।  हजरत अली के सिपहसालार ...

मौला अली की शान में आशार , शेर, कलाम - hindi me,

 मौला अली की शान में आशार , शेर, कलाम  इससे ज्यादा क्या कहू मौला की शान में  पैदा हुए आप खुदा के मकान में  जबसे पढ़ा है क़सीदा मौला की शान में  ताक़त सी आ गयी है मेरे ज़िस्म ओ जान में  मुश्किलकुशा है, आते है मुश्किलकुशाई में  उनको पुकारे कोई किसी भी ज़ुबान में  करने लगे तवाफ़ फ़रिश्तें मकान का  मैं ज़िक्र कर रहा था अली का मकान में  4 खुलफ़ाए राशेदीन में अली ,  5 पंजतन में अली,  10 अशराये मुब्बशिरा में अली,  313 अस्हाबे बद्र में अली, साबे मदीना में अली  ग़दीरे कून में अली, सुलेह हुदैबिया में अली, ख़ैबर में अली, ख़ंदक़ में अली,  मेहराब पे अली तो मिम्बर पे भी अली,  क़ाबा गवाह है दोषे पयम्बर पे भी अली,  हिज़रत की शब् हुज़ूर के बिस्तर पे भी अली,  जन्नत अली की मिल्क है कौसर पे भी अली,  बू ज़र में भी अली, तो सलमान में भी अली, आबाद दमा दम आदम के,  तन तन में अली, पंजतन में अली, लफ्ज़ो में अली,आहो  में अली, अश्क़ो में अली, धड़कन में अली,  फूलों में अली, लहजो में अली,  कलियों में अली, गुलशन में अली, सेहर...

फ़रमाने हज़रत अली (करम अल्लाहो वज़हुल करीम ) हिंदी में - Sayings of Maula Ali - Karam Allaho Wazahul Kareem

Image for representation purpose only फ़रमाने हज़रत अली (करम अल्लाहो वज़हुल करीम) हिंदी में    Sayings of Maula Ali -  (Karam Allaho Wazahul Kareem) जिस शख्श के  दुश्मन न हो सभी दोस्त हो, उस जैसा मुनाफ़िक़ कोई नहीं।  क्योंकि दुश्मन उसके होते है, जो हक़ की बात करता है।  - हज़रत अली (करम अल्लाहो वज़हुल करीम) इल्म वह खज़ाना है जिस का ज़ख़ीरा बढ़ता ही रहता है ।  - हज़रत अली (करम अल्लाहो वज़हुल करीम) जब तुम बेगैर किसी वज़ह से ख़ुशी महसूस करो तो यक़ीन कर लो कि कोई न कोई किसी न किसी जगह जगह आपके लिये दुआ कर रहा है।  - हज़रत अली (करम अल्लाहो वज़हुल करीम) मुश्किलतरीन काम बेहतरीन लोगों के हिस्से में आते है क्योंकि वो उसे हल करने की सलाहियत रखते है ।  - हज़रत अली (करम अल्लाहो वज़हुल करीम) अक्लमंद अपने आप को नीचा रखकर बुलंदी हासिल करता है और नादान अपनेआप को बड़ा समझ कर ज़िल्लत उठता है ।  - हज़रत अली (करम अल्लाहो वज़हुल करीम) कम खाने में सेहत है, कम बोलने में समझदारी है और कम  सोना ईबादत है ।  - हज़रत अली (करम अल्लाहो वज़हुल करीम) जहां तक हो ...

मौला अली (करम अल्लाहो वजाहुल करीम) के फ़ज़ाइल व मनाक़िब : हिंदी में

Image for representation purpose only मौला अली (करम अल्लाहो वजाहुल करीम) के फ़ज़ाइल व मनाक़िब : हिंदी में  रसूलल्लाह  (सल्लाहों ताला अलैहे वसल्लम)   ने फ़रमाया,  "अली तुम्हारी मेरे साथ वही मन्ज़िलत है जो सय्यिदना हारुन (अलैहिस सलाम) को  सय्यिदना मूसा (अलैहिस सलाम) से थी मगर यह कि मेरे बाद कोई नबी नहीं है". यानी अगर नबी सल्लाहों अलैहि वसल्लम के बाद कोई नबी होता तो वो हज़रत अली होते।   (सही बुखारी : हदीस न० 3706, सहीह मुस्लिम  हदीस न० 6217, 6221 /2404)  "जिसका मैं मौला उसका अली मौला"  ( जामे तिर्मिज़ी हदीस न० 3713, मुस्तब्रक अल हाकिम हदीस 4576, मिश्कात : हदीस न० 6013 ) "मोमिन हज़रत अली से मुहब्बत रखेगा और मुनाफिक़ीन हज़रत अली से बुब्ज रखेगा"।         (सही मुस्लिम    हदीस न० 240 / 78)  "आप (सल्ल०) सैयदना अली (रज़ि०) के पास गए, वो लेटे हुए थे और चादर उनके पहलू से अलग हो गई थी और (उन के बदन से) मिट्टी लग गई थी, तो रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने वो मिट्टी पोंछना शुरू किया और फ़रमाने लगे कि ऐ अबू-तुराब ! उठ। ऐ अबू-तुराब ...