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Showing posts with the label Deeni baatein

Jung e Siffin - Haq-Baatil aur Momin-munafeqeen ki jung in hindi

                जंग ए  सिफ़्फ़ीन                   - हक़ और बातिल की जंग  जंग ए सिफ़्फ़ीन इस्लामी तारीख़ की वो जंग है जिसने मुसलमानों के बीच हक़ - बातिल और मोमिन - मुनाफिक़ीन के फ़र्क़ को साफ़ कर दिया।   साल 657 ईस्वी में जब तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा की शहादत हो गयी और उम्मत ने हज़रत अली  रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा को चौथा ख़लीफ़ा चुन लिया, तब शाम यानी आज का सीरिया के गवर्नर मुआविया बिन सुफ़ियान ने हज़रत उस्मान के क़ातिलों को पकड़ने का मुतालबा हज़रत अली से करने लगा, जबकि हज़रत अली का कहना था कि असली मुज़रिम को पकड़ने के लिये थोड़ा वक़्त चाहिए , लेकिन मुआविया बिन सुफ़ियान इस कदर अपनी ज़िद पे आ गया और उसने हज़रत अली से जंग करने का इरादा बना लिया।   फरात नदी के किनारे सिफ़्फ़ीन के मैदान में ये दोनों फौजे टकराने वाली थी।  जंग की शुरुआत प्यास से हुई जब मुआविया की फौज ने फरात नदी पे कब्ज़ा कर लिया और हज़रत अली के लश्करों के लिए पानी बंद कर दिया।  हजरत अली के सिपहसालार ...

Allah ke Wali ki Shan me Quranic Ayat aur Hadees

Image for representation only   Allah ke Wali ki Shan me Quranic Ayat aur Hadees Surah Younus, Ayat No. 62 -       Jonah (10:62)  أَلَآ إِنَّ أَوْلِيَآءَ ٱللَّهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ ٦٢ There will certainly be no fear for the close servants of Allah, nor will they grieve. सुन लो! निःसंदेह अल्लाह के मित्रों को न कोई भय है और न वे शोकाकुल होंगे। Holy Quran:  10-62 Hadees e Nabvi-saw حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَعُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، قَالاَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ الْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ بْنِ عَمْرِو بْنِ جَرِيرٍ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِنَّ مِنْ عِبَادِ اللَّهِ لأُنَاسًا مَا هُمْ بِأَنْبِيَاءَ وَلاَ شُهَدَاءَ يَغْبِطُهُمُ الأَنْبِيَاءُ وَالشُّهَدَاءُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ بِمَكَانِهِمْ مِنَ اللَّهِ تَعَالَى ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ تُخْبِرُنَا مَنْ هُمْ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ هُمْ قَوْمٌ تَحَابُّوا بِرُوحِ اللَّهِ عَلَى غَيْرِ أَرْحَا...

Was Imam Ali the true successor of Prophet Muhammad- Pbuh ? - A Study in the light of Holy Quran and Hadith

Was Imam Ali the true Successor of Prophet Muhammad- Pbuh ? - A Study in the light of Holy Quran and Hadith As Salaam o Alaikum, Friends, After Holy Prophet Muhammad -Pbuh left this world, Muslims got split in two Sects i.e. Sunni and Shia. Many Muslims ask the question,  who was the true successor of Prophet Muhammad - Peace be upon him in the light of Holy Quran and Hadith ?   Sunni Muslims believe that Hazrat Abu Bakar r.a., being one of the closest companions and father-in-law of the Prophet, was chosen by the community as the first caliph (successor).  While  Shia Muslims believe that Prophet Muhammad - Pbuh designated his cousin and son-in-law, Ali, as his successor through various statements and actions, including the event at Ghadeer e Khum.  Shia Muslims see Ali and his descendants (the Imams) as divinely appointed leaders of the Muslim community, holding both religious and political authority.   Here  Let us know who is the true suc...

मौला अली की शान में आशार , शेर, कलाम - hindi me,

 मौला अली की शान में आशार , शेर, कलाम  इससे ज्यादा क्या कहू मौला की शान में  पैदा हुए आप खुदा के मकान में  जबसे पढ़ा है क़सीदा मौला की शान में  ताक़त सी आ गयी है मेरे ज़िस्म ओ जान में  मुश्किलकुशा है, आते है मुश्किलकुशाई में  उनको पुकारे कोई किसी भी ज़ुबान में  करने लगे तवाफ़ फ़रिश्तें मकान का  मैं ज़िक्र कर रहा था अली का मकान में  4 खुलफ़ाए राशेदीन में अली ,  5 पंजतन में अली,  10 अशराये मुब्बशिरा में अली,  313 अस्हाबे बद्र में अली, साबे मदीना में अली  ग़दीरे कून में अली, सुलेह हुदैबिया में अली, ख़ैबर में अली, ख़ंदक़ में अली,  मेहराब पे अली तो मिम्बर पे भी अली,  क़ाबा गवाह है दोषे पयम्बर पे भी अली,  हिज़रत की शब् हुज़ूर के बिस्तर पे भी अली,  जन्नत अली की मिल्क है कौसर पे भी अली,  बू ज़र में भी अली, तो सलमान में भी अली, आबाद दमा दम आदम के,  तन तन में अली, पंजतन में अली, लफ्ज़ो में अली,आहो  में अली, अश्क़ो में अली, धड़कन में अली,  फूलों में अली, लहजो में अली,  कलियों में अली, गुलशन में अली, सेहर...

हदीस ए नबवी हज़रत मोहम्मद (स.अलैह.) दरूद शरीफ़ के बारे में - हिंदी में

  हदीस ए नबवी  हज़रत  मोहम्मद  (स.अलैह.) दरूद शरीफ़ के बारे में - हिंदी में  अब्दुर्रहमान बिन अबी लैला ने रिवायत किया:  कअब बिन उजरा ने मुझसे मुलाकात की और कहा, "क्या मैं तुम्हें पैगम्बर से मिला हुआ तोहफा न दूं?" अब्दुर्रहमान ने कहा, "हां, मुझे दे दो।" मैंने कहा, "हमने अल्लाह के रसूल (ﷺ) से पूछा, 'अल्लाह के रसूल (ﷺ)! आप पर, परिवार के सदस्यों पर किस तरह से दुआ भेजी जाए, क्योंकि अल्लाह ने हमें आपको (नमाज़ में) सलाम करना सिखाया है?' उन्होंने कहा, 'कहो: ऐ अल्लाह! मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर अपनी रहमत भेज, जैसा कि तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर अपनी रहमत भेजी, क्योंकि तू सबसे प्रशंसनीय, सबसे महिमावान है। ऐ अल्लाह! मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर अपनी रहमत भेज, जैसा कि तूने इब्राहीम और इब्राहीम के परिवार पर अपनी रहमत भेजी, क्योंकि तू सबसे प्रशंसनीय, सबसे महिमावान है।'" Narrated `Abdur-Rahman bin Abi Laila:  Ka`b bin Ujrah met me and said, "Shall I not give you a present I got from the Prophet?" `Abdur- Rahman said, "Yes, ...

Farmane Hazrat Ali - R.A. - English aur Hindi me

  फ़रमाने हज़रत अली - रज़िअल्लाहो ताला अन्हु  15 Hazrat Ali Quotes in English and Hindi   नेक लोगों की सोहबत से हमेशा भलाई ही मिलती हैं , क्योकि हवा जब फूलो से गुज़रती हैं , तो वो भी खुशबूदार हो जाती हैं। Good society always gets good health, because when the wind passes through the blossoms, it also becomes aromatic. Hazrat Ali   अगर कोई शख्स अपनी भूख मिटाने के लिए रोटी चोरी करे , तो चोर के हाथ काटने के बजाए बादशाह के हाँथ काटे जाए। If a person steals the bread to erase his hunger, then instead of cutting the thief’s hand, the king should be cut off. Hazrat Ali   यदि आप किसी चीज को नहीं जानते हैं तो उसे जानने में कभी भी संकोच या शर्म महसूस न करें। If you don’t know a thing never hesitate or feel ashamed to learn it. Hazrat Ali   नफरत   से भरे दिल में प्यार जगाने से , पहाड़ को धूल में बदलना आसान हैं It is easier to turn a mountain into dust than to create love in a heart that is filled with hatred. Hazrat Ali   जब ज्ञान की बात आती है तो मौन में को...

रमज़ान मुबारक़ - Ramadan Mubarak, hindi me, Ramzaan Mubarak,

  रमज़ान मुबारक़  इस्लामी कैलेंडर का नौवाँ महीना रमज़ान , सिर्फ़ रोज़े के महीने से कहीं बढ़कर है - यह एक गहरा आध्यात्मिक समय है जिसके बारे में कुरान खुद भी बहुत ही गहन और प्रेरणादायक तरीके से बात करता है। तो कुरान रमज़ान के बारे में क्या कहता है ? और इसे मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र महीना क्यों माना जाता है ? आइए जानें कि कुरान इस पवित्र महीने के महत्व , उद्देश्य और शक्ति को कैसे खूबसूरती से बुनता है।   कुरान रोज़े को किसी महान चीज़ को प्राप्त करने के साधन के रूप में पेश करता है : तक़वा , या ईश्वर - चेतना। अल्लाह आदेश देता है : " ऐ तुम जो ईमान लाए हो , तुम पर रोज़ा उसी तरह से फ़र्ज़ किया गया है जैसा कि तुमसे पहले के लोगों पर फ़र्ज़ किया गया था ताकि तुम नेक बनो। " पवित्र कुरान - सूरह अल - बक़रा आयत संख्या 183 रोज़ा कोई सज़ा या महज़ रस्म नहीं है। यह एक आध्यात्मिक अभ्यास है , आत्मा के लिए एक प्रशिक्षण मैदान है। सुबह से शा...