Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Islamic history

Jung e Siffin - Haq-Baatil aur Momin-munafeqeen ki jung in hindi

                जंग ए  सिफ़्फ़ीन                   - हक़ और बातिल की जंग  जंग ए सिफ़्फ़ीन इस्लामी तारीख़ की वो जंग है जिसने मुसलमानों के बीच हक़ - बातिल और मोमिन - मुनाफिक़ीन के फ़र्क़ को साफ़ कर दिया।   साल 657 ईस्वी में जब तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा की शहादत हो गयी और उम्मत ने हज़रत अली  रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा को चौथा ख़लीफ़ा चुन लिया, तब शाम यानी आज का सीरिया के गवर्नर मुआविया बिन सुफ़ियान ने हज़रत उस्मान के क़ातिलों को पकड़ने का मुतालबा हज़रत अली से करने लगा, जबकि हज़रत अली का कहना था कि असली मुज़रिम को पकड़ने के लिये थोड़ा वक़्त चाहिए , लेकिन मुआविया बिन सुफ़ियान इस कदर अपनी ज़िद पे आ गया और उसने हज़रत अली से जंग करने का इरादा बना लिया।   फरात नदी के किनारे सिफ़्फ़ीन के मैदान में ये दोनों फौजे टकराने वाली थी।  जंग की शुरुआत प्यास से हुई जब मुआविया की फौज ने फरात नदी पे कब्ज़ा कर लिया और हज़रत अली के लश्करों के लिए पानी बंद कर दिया।  हजरत अली के सिपहसालार ...

Jung e Siffin - Haq-Baatil aur Momin-munafeqeen ki jung in hindi

                जंग ए  सिफ़्फ़ीन                   - हक़ और बातिल की जंग  जंग ए सिफ़्फ़ीन इस्लामी तारीख़ की वो जंग है जिसने मुसलमानों के बीच हक़ - बातिल और मोमिन - मुनाफिक़ीन के फ़र्क़ को साफ़ कर दिया।   साल 657 ईस्वी में जब तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा की शहादत हो गयी और उम्मत ने हज़रत अली  रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा को चौथा ख़लीफ़ा चुन लिया, तब शाम यानी आज का सीरिया के गवर्नर मुआविया बिन सुफ़ियान ने हज़रत उस्मान के क़ातिलों को पकड़ने का मुतालबा हज़रत अली से करने लगा, जबकि हज़रत अली का कहना था कि असली मुज़रिम को पकड़ने के लिये थोड़ा वक़्त चाहिए , लेकिन मुआविया बिन सुफ़ियान इस कदर अपनी ज़िद पे आ गया और उसने हज़रत अली से जंग करने का इरादा बना लिया।   फरात नदी के किनारे सिफ़्फ़ीन के मैदान में ये दोनों फौजे टकराने वाली थी।  जंग की शुरुआत प्यास से हुई जब मुआविया की फौज ने फरात नदी पे कब्ज़ा कर लिया और हज़रत अली के लश्करों के लिए पानी बंद कर दिया।  हजरत अली के सिपहसालार ...

Muawiya bin Sufyan's hypocrisy - in the light of Holy Quran and Sahih Hadith

  Muawiya bin Sufyan's hypocrisy -  in the light of Holy Quran and Sahih Hadith Assalamu Aleikum friends, Earlier in the blog we had written about the reality of Amir Muawiya - in the light of Quran and Hadith, the link of which is mentioned below. In today's blog we will know about Muawiya's hypocrisy in the light of Quran and Hadith. Let us know about Muawiya's hypocrisy in the light of Quran and Sahih Hadith. First of all I present verse number 57 of Surah Ahzab of the Holy Quran, in which Allah says that, "Whoever abuses Allah and His Messenger - Peace be upon him, Allah's curse is on them in this world and the hereafter". إِنَّ ٱلَّذِينَ يُؤْذُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ لَعَنَهُمُ ٱللَّهُ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًۭا مُّهِينًۭا ٥٧ Surely those who offend Allah and His Messenger are condemned by Allah in this world and the Hereafter. And He has prepared for them a humiliating punishment. Holy Quran: Chapter Ahzab Verse No. 57...

क्या क़ुरान फ़िरक़ा-वारीअत के खिलाफ है ? और 73 फ़िरक़ों वाली हदीस क्या है ? hindi me

Image for representation only     Kya Quran Firqa wariat ke khilaaf hai?  क्या क़ुरान फ़िरक़ा-वारीअत के खिलाफ है ? और 73 फ़िरक़ों वाली हदीस क्या है ? अस सलामों अलैकुम दोस्तों, जैसा की आजकल देखा जा रहा है मुस्लिम समाज में बहोत से फ़िरक़े बन गए है और वो सभी अपने को मुस्लिम कहते है तो आईए जानते है इस्लाम की सबसे प्रमुख किताब जोकि क़ुरान शरीफ है उसमे अल्लाह पाक ने क्या फ़रमाया है।  तो सबसे पहले क़ुरान की तीसरी सूरह इमरान की आयत नंबर 102 और 103 पढ़ते है।    Quran - 3:102 يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ حَقَّ تُقَاتِهِۦ وَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسْلِمُونَ ١٠٢ O believers! Be mindful of Allah in the way He deserves, and do not die except in ˹a state of full˺ submission ˹to Him˺. ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो, जैसा कि उससे डरना चाहिए तथा तुम्हारी मृत्यु न आए परंतु इस स्थिति में कि तुम मुसलमान हो। Quran - 3:103 وَٱعْتَصِمُوا۟ بِحَبْلِ ٱللَّهِ جَمِيعًۭا وَلَا تَفَرَّقُوا۟ ۚ وَٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ كُنتُمْ أَعْدَآءًۭ فَأَلَّفَ ب...

अमीर मुआवियां की हक़ीक़त - क़ुरान और सही हदीस की रोशनी में - Ameer Muawiya ki haqeeqat - Hindi mein

अमीर मुआवियां की हक़ीक़त -  क़ुरान और सही हदीस की रोशनी में  अस्सलामों अलैकुम दोस्तों,  अगर देखा जाये तो हमको पता चलता है कि इस्लामिक हिस्ट्री में अमीर मुआविया एक बहुत ही कंट्रोवर्सी वाले शख्शियत रहे है।  अगर इनकी हिस्ट्री पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि शुरू से ही इनके बारे में इस्लामिक विद्यवान और बड़े बड़े उलेमाओं की अलग अलग राय रही है।  आईये इनके बारे में कुछ जरुरी बाते जानते है।   अमीर मुआविया अबू सुफ़ियान और हिंदा के बेटे है, जिन्होंने रसूलल्लाह सल्लाहों अलैहि वसल्लम से बहोत से जंगे की थी, और जंगे ओहद में हज़रत हमज़ा रज़ि० को शहीद किया गया था।  जब फ़तेह मक्का हो गया तो इन लोगों  ने क़त्ल किये जाने के डर से ईमान ले आये थे। इन लोगों को तुलका कहा जाता था तुलका मतलब होता है जिनको क़त्ल किये जाने से छोड़ दिया गया हो या आज़ाद कर दिया गया हो।   नोट :      अगर इस्लाम में जो शख़्स ईमान की हालत में रसूलल्लाह सल्लाहों अलैहि वसल्लम को अपनी ज़िन्दगी में देख लेता है तो उसको सहाबी कहा जाता है, लेकिन शर्त ये हो कि दिल से ईमान लाये हो , लेकिन जो दिल में...

LIFE OF PROPHET MUHAMMAD (PBUH) : A TIMELINE

  Image is representative only THE LIFE OF MUHAMMAD (PBUH): A TIMELINE Early Meccan period 570  AD (52 years Before Hijrah or Migration to Medina) Muhammad Ibn Abd Allah (Peace be upon him) born in the city of Mecca (a city in the Hejaz, lit. literally “the barrier”, a region in the west of present-day Saudi Arabia), in the Year of the Elephant. The observance of the birthday of the Prophet Muhammad is celebrated on the 12 th  day of Rabi’ al-Awwal, the third month in the Islamic calendar. According to Ibn Ishaq was a Monday.  In the Qur’an, in the  Surah  (chapter)  Yunus  10:6 we can read: Say, “If Allah had willed, I would not have recited it to you, nor would He have made it known to you, for I had remained among you a lifetime before it. Then will you not reason?” This  ayah  (verse) it can be interpreted like between the birth of Muhammad and the first appearance of the Qur’an that had been revealed to him an age ...