फरमाने हज़रत ईमाम हुसैन - अलैहिस सलाम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जितनी देर से उठोगे उतनी ज्यादा क़ुरबानी देनी पड़ेगी - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जिसका मददग़ार खुदा के आलावा कोई न हो, ख़बरदार उस पर ज़ुल्म न करना - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जो व्यक्ति अपने गुस्से पर क़ाबू रखता है, अल्लाह उसके ऐब छुपा देता है - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम सूफ़ी वह नहीं जो सिर्फ पहनावे से पहचाना जाये, बल्कि सूफ़ी वह है जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम
Hazrat Imam Hussain A.S. aur Hazrat Imam Hassan Mujtaba A.S. ke Fazail va Manaqib from Sunni Books in Arabic, English & Hindi.
image for representation only हज़रत इमाम हुसैन (अलैहिस सलाम) और हज़रत इमाम हसन (अलैहिस सलाम) के फ़ज़ाइल व मनाक़िब सुन्नियों की किताबों से : अरबी, इंग्लिश, व हिंदी में अस सलामों अलैकुम, दोस्तों , हज़रत इमाम हसन और इमाम हुसैन - अलैहिस सलाम , हमारे नबी हज़रत मुहम्मद (ﷺ) के नवासे है और हज़रत अली - करम अल्लाहो वजाहुल करीम और सैय्यदा फ़ातिमा ज़ेहरा - सलाम उल्लाह अलैहि के बेटे है। हमारे आक़ा और अल्लाह के रसूल (ﷺ) को अपने नवासों से बड़ी मुहब्बत करते थे और वो उनको प्यार से अपने बेटे कहा करते थे। उनकी मुहब्बत का आलम ये था कि जब कभी उनके रोने की आवाज़ सुनते तो वो तड़प जाते और पता करते आखिर दोनों शहज़ादे क्यों रो रहे है। अक्सर रसूलल्लाह (ﷺ) उन दोनों शहज़ादे को अपने कंधे पर बैठा कर मदीने की गलियों में घूमा करते थे अगर रास्ते में कोई सहाबी कहते की ऐ शहज़ादे आपकी सवारी कितनी अच्छी है तो ...