Sahaba Iqram ki vo Haqeeqat jo aksar Molvi bayan nahi karte hai सहाबा इक़राम की वो हकीकत जो अक्सर मौलवी बयान नहीं करते है। दोस्तों, आपलोगों ने भी अक्सर मौलवी के बयान में सहाबा इक़राम रज़ि० का बयान सुना होगा और मौलवी जब बयान करते है तो ऐसे बायां करते है कि सहाबा इक़राम एकदम मासूम हो और उनसे कभी कोई गलती हुई ही नहीं हो और सबके सब जन्नती है। लेकिन क्या हमने कभी ये जानने की कोशिश किया कि क़ुरआन और हदीस ए नबवी में इनके बारे में क्या लिखा है। सबसे पहले ये जानते है कि इस्लाम की सबसे बड़ी किताब जिसमें अल्लाह का फ़रमान है यानी क़ुरआन शरीफ़ में सहाबा इक़राम रज़ि० के बारे में क्या लिखा है। इसके लिए हमको सूरह तौबा की आयत नंबर 100 पढ़ते है। The Repentance (9:100) وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلْأَوَّلُونَ مِنَ ٱلْمُهَـٰجِرِينَ وَٱلْأَنصَارِ وَٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُم بِإِحْسَـٰنٍۢ رَّضِىَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا۟ عَنْهُ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى تَحْتَهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ١٠٠ As...
Image for representational only फ़रमाने हज़रत उस्मान (रज़ि अल्लाहो तआला अन्हा) हिंदी में - हज़रत उस्मान गनी (रज़ि०) फरमाते है कि, 'जानवर अपने मालिक को पहचानता है, लेकिन इंसान अपने ख़ालिक़ को नहीं पहचानता। हज़रत उस्मान गनी (रज़ि०) फरमाते है कि, 'मुझे 3 काम बहुत अज़ीज़ है (1) भूखे को खाना खिलाना (2) नंगे को कपड़े पहनाना (3) क़ुरआने पाक पढ़ना और पढ़वाना । हज़रत उस्मान गनी (रज़ि०) फरमाते है कि, 'खुदा के सिवा किसीसे उम्मीद क़ायम न करो ।