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Showing posts from December, 2024

Sahaba Iqram ki vo Haqeeqat jo aksar Molvi bayan nahi karte hai

  Sahaba Iqram ki vo Haqeeqat jo aksar Molvi bayan nahi karte hai सहाबा इक़राम की वो हकीकत जो अक्सर मौलवी बयान नहीं करते है।   दोस्तों, आपलोगों ने भी अक्सर मौलवी के बयान  में सहाबा इक़राम रज़ि० का बयान सुना होगा और मौलवी जब बयान करते है तो ऐसे बायां करते है कि सहाबा इक़राम एकदम मासूम हो और उनसे कभी कोई गलती हुई ही नहीं हो और सबके सब जन्नती है।  लेकिन क्या हमने कभी ये जानने की कोशिश किया कि क़ुरआन और हदीस ए नबवी में इनके बारे में क्या लिखा है।   सबसे पहले ये जानते है कि इस्लाम की सबसे बड़ी किताब जिसमें अल्लाह का फ़रमान है यानी क़ुरआन शरीफ़ में सहाबा इक़राम रज़ि० के बारे में क्या लिखा है। इसके लिए हमको सूरह तौबा की आयत नंबर 100 पढ़ते है।   The Repentance (9:100)  وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلْأَوَّلُونَ مِنَ ٱلْمُهَـٰجِرِينَ وَٱلْأَنصَارِ وَٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُم بِإِحْسَـٰنٍۢ رَّضِىَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا۟ عَنْهُ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى تَحْتَهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ١٠٠ As...

Duaa sirf Allah se hi - hindi me

  Duaa sirf Allah se hi  दुआ सिर्फ अल्लाह से ही  अस्सलामों अलैकुम,  दोस्तों आज हम जानने की कोशिश करेंगे कि क्या दुआ सिर्फ अल्लाह से ही करना चाहिए ? सबसे पहले हम ये जान लेते है कि दुआ का क्या मतलब होता है? दुआ का मतलब होता है, पुकारना, बुलाना, इल्तिज़ा करना, माँगना, सवाल करना इत्यादी।   अब क़ुरआन शरीफ़ की सूरह बक़रह की आयत नंबर 186 पढ़ते है, जिसमे अल्लाह पाक फरमाते है कि  2:186 وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِى عَنِّى فَإِنِّى قَرِيبٌ ۖ أُجِيبُ دَعْوَةَ ٱلدَّاعِ إِذَا دَعَانِ ۖ فَلْيَسْتَجِيبُوا۟ لِى وَلْيُؤْمِنُوا۟ بِى لَعَلَّهُمْ يَرْشُدُونَ ١٨٦ When My servants ask you ˹O Prophet˺ about Me: I am truly near. I respond to one’s prayer when they call upon Me. So let them respond ˹with obedience˺ to Me and believe in Me, perhaps they will be guided ˹to the Right Way˺. और (ऐ नबी!) जब मेरे बंदे आपसे मेरे बारे में पूछें, तो निश्चय मैं (उनसे) क़रीब हूँ। मैं पुकारने वाले की दुआ क़बूल करता हूँ जब वह मुझे पुकारता है। तो उन्हें चाहिए कि वे मेरी बात मानें तथा मुझपर ईमान लाएँ,...

क्या क़ुरान फ़िरक़ा-वारीअत के खिलाफ है ? और 73 फ़िरक़ों वाली हदीस क्या है ? hindi me

Image for representation only     Kya Quran Firqa wariat ke khilaaf hai?  क्या क़ुरान फ़िरक़ा-वारीअत के खिलाफ है ? और 73 फ़िरक़ों वाली हदीस क्या है ? अस सलामों अलैकुम दोस्तों, जैसा की आजकल देखा जा रहा है मुस्लिम समाज में बहोत से फ़िरक़े बन गए है और वो सभी अपने को मुस्लिम कहते है तो आईए जानते है इस्लाम की सबसे प्रमुख किताब जोकि क़ुरान शरीफ है उसमे अल्लाह पाक ने क्या फ़रमाया है।  तो सबसे पहले क़ुरान की तीसरी सूरह इमरान की आयत नंबर 102 और 103 पढ़ते है।    Quran - 3:102 يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ حَقَّ تُقَاتِهِۦ وَلَا تَمُوتُنَّ إِلَّا وَأَنتُم مُّسْلِمُونَ ١٠٢ O believers! Be mindful of Allah in the way He deserves, and do not die except in ˹a state of full˺ submission ˹to Him˺. ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो, जैसा कि उससे डरना चाहिए तथा तुम्हारी मृत्यु न आए परंतु इस स्थिति में कि तुम मुसलमान हो। Quran - 3:103 وَٱعْتَصِمُوا۟ بِحَبْلِ ٱللَّهِ جَمِيعًۭا وَلَا تَفَرَّقُوا۟ ۚ وَٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ كُنتُمْ أَعْدَآءًۭ فَأَلَّفَ ب...