फरमाने हज़रत ईमाम हुसैन - अलैहिस सलाम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जितनी देर से उठोगे उतनी ज्यादा क़ुरबानी देनी पड़ेगी - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जिसका मददग़ार खुदा के आलावा कोई न हो, ख़बरदार उस पर ज़ुल्म न करना - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जो व्यक्ति अपने गुस्से पर क़ाबू रखता है, अल्लाह उसके ऐब छुपा देता है - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम सूफ़ी वह नहीं जो सिर्फ पहनावे से पहचाना जाये, बल्कि सूफ़ी वह है जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम
पैग़म्बर मुहम्मद सल्लाहों अलैहि वसल्लम के बाद, अफ़ज़लियत इमाम अली अलैहिस सलाम - क़ुरान और हदीस की रौशनी में - हिंदी में
नबी सल्लाहों अलैहि वसल्लम के बाद, जो सबसे अफ़ज़ल है वो इमाम अली अलैहिस सलाम है - क़ुरान और हदीस की रौशनी में - हिंदी में अस सलामों अलैकुम, दोस्तों अगर हम इस्लामी दौर के प्रमुख शख़्शियत के बारे में बात करे तो, बेशक़ सबसे पहले हमारे आक़ा और अल्लाह के रसूल, हज़रत मुहम्मद सल्लाहों अलैहि वसल्लम ही है, उनको इस्लाम के दो प्रमुख फ़िरक़े शिया और सुन्नी दोनों ही मानते है । लेकिन अगर पैग़म्बर मुहम्मद स० के बाद कौन सबसे अफ़ज़ल है , ये अगर किसी शिया के पूछा जाये तो वो हज़रत इमाम अली अलैहिस सलाम को सबसे अफ़ज़ल बताएँगे । लेकिन अगर सुन्नी से पूछा जाये तो ज्यादातर सुन्नी खुलफ़ा ए राशिदीन में से सबसे पहले ख़लीफ़ा हज़रत अबू बकर सिद्दीक रज़ि० का नाम लेंगे। हालांकि सुन्नी भी हज़रत अली रज़ि० को चौथे ख़लीफ़ा मानते है। हज़रत अली रज़ि० जो कि न सिर्फ दामाद ए रसूल (स०) थे बल्कि वो रसूलल्लाह (स०) के चचाज़ात भाई भी थे यानी की वो अहलेबैत में से थे। आईए अब जानते है कि अल्लाह और उसके रसूल स० ने क़ुरान और हदीस के जरिये जिस शख़्शियत को पैग़म्बर मुहम्मद सल्लाहों अलैहि वसल्लम के बाद सबसे अफ़ज़ल बताया...