फरमाने हज़रत ईमाम हुसैन - अलैहिस सलाम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जितनी देर से उठोगे उतनी ज्यादा क़ुरबानी देनी पड़ेगी - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जिसका मददग़ार खुदा के आलावा कोई न हो, ख़बरदार उस पर ज़ुल्म न करना - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जो व्यक्ति अपने गुस्से पर क़ाबू रखता है, अल्लाह उसके ऐब छुपा देता है - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम सूफ़ी वह नहीं जो सिर्फ पहनावे से पहचाना जाये, बल्कि सूफ़ी वह है जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम
गुस्सा (क्रोध) के बारे में इस्लाम क्या कहता है ? what Islam says about Anger ? Image for representation only दोस्तों, इन्सान को गुस्सा आना बहुत आम बात है, आजकल इंसान ज़रा ज़रा सी बात पर बहुत गुस्सा दिखाने लगता है और वो गुस्से में बड़े छोटे का लिहाज़ भी भूल जाता है, और कभी कभी इंसान गुस्से में वो गलती कर देता है जिसका उसको जीवन भर पछतावा होता है । इसलिए आइये जानते है कि ग़ुस्से (क्रोध) के बारे में इस्लाम क्या कहता है ? हज़रत अबु हुरैरा (रज़ि अल्लाहो ताला अन्हा) से रिवायत है कि एक शख्श ने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अर्ज़ किया, मुझे आप कोई नसीहत फ़रमा दीजिये तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया कि "गुस्सा न किया कर, उसने कई बार यही सवाल किया और आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यही फ़रमाया कि गुस्सा न किया कर" । सही बुखारी (६११६ ) इंसान जब बह्स करता है तो गुस्सा और बढ़ जाता है । इसी लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया किः “मैं उस व्यक्ति के लिए जन्नत में एक घर...