फरमाने हज़रत ईमाम हुसैन - अलैहिस सलाम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जितनी देर से उठोगे उतनी ज्यादा क़ुरबानी देनी पड़ेगी - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जिसका मददग़ार खुदा के आलावा कोई न हो, ख़बरदार उस पर ज़ुल्म न करना - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जो व्यक्ति अपने गुस्से पर क़ाबू रखता है, अल्लाह उसके ऐब छुपा देता है - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम सूफ़ी वह नहीं जो सिर्फ पहनावे से पहचाना जाये, बल्कि सूफ़ी वह है जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम
हज़रत अब्दुल क़ादिर जिलानी रहमत उल्लाह अलैहे का वाक़िया - एक डाकू कैसे अल्लाह का वली बन गया. Image is representational only पीरों के पीर हज़रत अब्दुल क़ादिर जिलानी रहमत उल्लाह अलैहे को भला इस दुनिया में कौन नहीं जानता, उनके मानने वाले दुनिया के कोने कोने में है. आज में आपको एक डाकू जो आगे चलकर अल्लाह का वली बन गए उनका वाक़िया बताने वाला हूँ। जब एक काफिला बगदाद की तरफ जा रहा था तो उस काफ़िले में एक नौउम्र लड़का भी था जब डाकुओं ने उस काफ़िले पर हमला कर दिया तो लोगो ने अपना माल छुपाने की कोशिश करने लगे लेकिन डाकुओं ने सब माल उनसे छीन लिया। जब सभी लोगो से पूछताछ होने लगी तो जब इस लड़के की बारी आयी तो डाकू ने पूछा की तुम्हारे पास भी कुछ माल है तो इस लड़के ने कहा हा मेरे पास ४० दीनार है तो डाकुओ को बड़ी हैरत हुई. तो डाकू ने पूछा की कहा है तो लड़के ने कहा मेरी कमर के कपडे में मेरी माँ ने सिलाई कर दिया है तो जब तलाशी ली गयी तो वो ४० दीनार निकल आयी। इस लड़के के सच बोलने पर डाकुओं के सरदार को सोचने पर मज़बूर कर दिया कि कैसे एक छोटा लड़का सच बोल रहा है औ...