फरमाने हज़रत ईमाम हुसैन - अलैहिस सलाम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जितनी देर से उठोगे उतनी ज्यादा क़ुरबानी देनी पड़ेगी - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जिसका मददग़ार खुदा के आलावा कोई न हो, ख़बरदार उस पर ज़ुल्म न करना - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जो व्यक्ति अपने गुस्से पर क़ाबू रखता है, अल्लाह उसके ऐब छुपा देता है - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम सूफ़ी वह नहीं जो सिर्फ पहनावे से पहचाना जाये, बल्कि सूफ़ी वह है जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम
हज़ और उमराह की फज़ीलत
रसूल अल्लाह सल्लाहों तआलाह अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया, "हज़ और उमराह करने वाले अल्लाह तआला की जमाअत है जब वह लोग दुआ करते है तो अल्लाह तआला उनकी मगफिरत फरमा देता है। (सही इब्ने माज़ा अल मनासिक, बाब फज़ले दुआ अल्हाज - 2892 )


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