Sahaba Iqram ki vo Haqeeqat jo aksar Molvi bayan nahi karte hai सहाबा इक़राम की वो हकीकत जो अक्सर मौलवी बयान नहीं करते है। दोस्तों, आपलोगों ने भी अक्सर मौलवी के बयान में सहाबा इक़राम रज़ि० का बयान सुना होगा और मौलवी जब बयान करते है तो ऐसे बायां करते है कि सहाबा इक़राम एकदम मासूम हो और उनसे कभी कोई गलती हुई ही नहीं हो और सबके सब जन्नती है। लेकिन क्या हमने कभी ये जानने की कोशिश किया कि क़ुरआन और हदीस ए नबवी में इनके बारे में क्या लिखा है। सबसे पहले ये जानते है कि इस्लाम की सबसे बड़ी किताब जिसमें अल्लाह का फ़रमान है यानी क़ुरआन शरीफ़ में सहाबा इक़राम रज़ि० के बारे में क्या लिखा है। इसके लिए हमको सूरह तौबा की आयत नंबर 100 पढ़ते है। The Repentance (9:100) وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلْأَوَّلُونَ مِنَ ٱلْمُهَـٰجِرِينَ وَٱلْأَنصَارِ وَٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُم بِإِحْسَـٰنٍۢ رَّضِىَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا۟ عَنْهُ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى تَحْتَهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ١٠٠ As...
मुआवियां बिन सूफियान की मुनाफ़िक़त - क़ुरान और सही हदीस की रोशनी में अस्सलामों अलैकुम दोस्तों, हमने इससे पहले ब्लॉग में अमीर मुआविया की हक़ीक़त - क़ुरान और हदीस की रौशनी में लिखा था, जिसका लिंक हमने नीचे उल्लेख किया है। आजके इस ब्लॉग में हम मुआवियाँ की मुनाफ़िक़त क़ुरान और हदीस की रौशनी में जानेंगे। आईये क़ुरान और सही हदीस की रोशनी में मुआविया की मुनाफ़िक़त को जानते है। सबसे पहले क़ुरआन शरीफ़ की सूरह अहज़ाब की आयत नंबर 57 पेश करता हू, जिसमें अल्लाह पाक फरमाते है कि, "जिसने अल्लाह और उसके रसूल सल्लाहों अलैहि वसल्लम को गाली दी, उनपर दुनिया और आख़िरत में अल्लाह की लानत है"। 33:57 إِنَّ ٱلَّذِينَ يُؤْذُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ لَعَنَهُمُ ٱللَّهُ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًۭا مُّهِينًۭا ٥٧ Surely those who offend Allah and His Messenger are condemned by Allah in this world and the Hereafter. And He has prepared for them a humiliating punishment. निस्संदेह, जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को बुरा भला कहते हैं, अल्लाह ...

Comments
Post a Comment