फरमाने हज़रत ईमाम हुसैन - अलैहिस सलाम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जितनी देर से उठोगे उतनी ज्यादा क़ुरबानी देनी पड़ेगी - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जिसका मददग़ार खुदा के आलावा कोई न हो, ख़बरदार उस पर ज़ुल्म न करना - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जो व्यक्ति अपने गुस्से पर क़ाबू रखता है, अल्लाह उसके ऐब छुपा देता है - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम सूफ़ी वह नहीं जो सिर्फ पहनावे से पहचाना जाये, बल्कि सूफ़ी वह है जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम
मुआवियां बिन सूफियान की मुनाफ़िक़त - क़ुरान और सही हदीस की रोशनी में अस्सलामों अलैकुम दोस्तों, हमने इससे पहले ब्लॉग में अमीर मुआविया की हक़ीक़त - क़ुरान और हदीस की रौशनी में लिखा था, जिसका लिंक हमने नीचे उल्लेख किया है। आजके इस ब्लॉग में हम मुआवियाँ की मुनाफ़िक़त क़ुरान और हदीस की रौशनी में जानेंगे। आईये क़ुरान और सही हदीस की रोशनी में मुआविया की मुनाफ़िक़त को जानते है। सबसे पहले क़ुरआन शरीफ़ की सूरह अहज़ाब की आयत नंबर 57 पेश करता हू, जिसमें अल्लाह पाक फरमाते है कि, "जिसने अल्लाह और उसके रसूल सल्लाहों अलैहि वसल्लम को गाली दी, उनपर दुनिया और आख़िरत में अल्लाह की लानत है"। 33:57 إِنَّ ٱلَّذِينَ يُؤْذُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ لَعَنَهُمُ ٱللَّهُ فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْـَٔاخِرَةِ وَأَعَدَّ لَهُمْ عَذَابًۭا مُّهِينًۭا ٥٧ Surely those who offend Allah and His Messenger are condemned by Allah in this world and the Hereafter. And He has prepared for them a humiliating punishment. निस्संदेह, जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को बुरा भला कहते हैं, अल्लाह ...