फरमाने हज़रत ईमाम हुसैन - अलैहिस सलाम ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जितनी देर से उठोगे उतनी ज्यादा क़ुरबानी देनी पड़ेगी - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जिसका मददग़ार खुदा के आलावा कोई न हो, ख़बरदार उस पर ज़ुल्म न करना - हज़रत ईमाम हुसैन अलैहिस सलाम जो व्यक्ति अपने गुस्से पर क़ाबू रखता है, अल्लाह उसके ऐब छुपा देता है - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम सूफ़ी वह नहीं जो सिर्फ पहनावे से पहचाना जाये, बल्कि सूफ़ी वह है जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा हो - हज़रत ईमाम ज़ाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम

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नमाज़ की फज़ीलत
हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रजि अल्लाहो तआलाह अन्हा फरमाते है कि मैंने रसूल अल्लाह सल्लाहों तआलाह अलैहे वसल्लम को यह इरशाद फरमाते हुए, "जब कोई शख्स नमाज़ के लिए खड़ा होता है तो उसके गुनाह उसके सर और कंधो पर रख दिए जाते है, जब-जब वह रुकुह और सज़दे में जाता है वह गुनाह गिरते रहते है (सही इब्ने हिब्बान- 4371)
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